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दिनेश रघुवंशी हिन्दी काव्य मंचों के अनुपम संचालक। जिनके संचालन की बुनियाद चुटकुलों से हटकर साहित्य पर टिकी होती है। उनमे काव्य की निरझरी में एक – एक श्रोता – डूब जाता है। वास्तव में दिनेश रघुवंशी हिन्दी कविता के फकीर हैं। वे कविता को बाजार में जाने से बचाना चाहते है। हम सब उनमें दूसरा कुंवर बेचैन देखते हैं। मुझ जैसे नन्हें कलमकारों को भी बेहद स्नेह देते हैं।
Posted by admin @ 5:22 am
2 Responses



December 3rd, 2008 at 5:33 am
दिनेश जी एक महान गीतकार, गज़लकार ही नही इस युग के महान नायक भी हैं, जिन्होने अपने परिश्रम और लगन से सफ़लता प्राप्त की है, जिनमे हमे अपने बड़े भाई की झलक मिलती है, इश्वर से यही प्रार्थना है कि वो दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की करें…और माँ शारदा का हमेशा उन पर आशीर्वाद बना रहे…
August 26th, 2009 at 3:22 am
DINESH DA,
NAMASKAR
HAR EK MEHFIL MEIN,APNI NISHANI CHOR JATE HO,
HASI HOTO PE TO,AANKHON MEIN PANI BHI CHOR JATE HO,
JISE SADIYO TALAK,SARA JAMANA YAD RAKHEGA,
JAMANE K LIYE,EK AISE KAHANI CHOR JATE HO,
DADA BUS AP AISE HI RAHO