रिस्तों की खुश्बू से जिनका तन-मन हर पल सुगन्धित रहता है और उस सुगन्ध से लेखनी को सराबोर करने वाले दिनेश रघुवंशी ने अपने अत्यंत संवेदनशील गीतों, ग़ज़लों, मुक्तकों, से साहित्य जगत तथा काव्य मंचों को सुसज्जित करके देश-विदेश के लाखों लोगों के दिलों पर अपनी श्रेठ रचनाओं के हस्ताक्षर अंकित किये हैं। उनको सदैव मेरा स्नेह व आभार ।
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Posted by admin @ 8:06 am


