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दिनेश रघुवंशी हिन्दी काव्य मंचों के अनुपम संचालक। जिनके संचालन की बुनियाद चुटकुलों से हटकर साहित्य पर टिकी होती है। उनमे काव्य की निरझरी में एक – एक श्रोता – डूब जाता है। वास्तव में दिनेश रघुवंशी हिन्दी कविता के फकीर हैं। वे कविता को बाजार में जाने से बचाना चाहते है। हम सब उनमें दूसरा कुंवर बेचैन देखते हैं। मुझ जैसे नन्हें कलमकारों को भी बेहद स्नेह देते हैं।
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दिनेश को मैं तब से जानता हूँ जब वह छात्र था इतना प्यारा कवि, इतना प्यारा आदमी, इतना प्यारा मित्र आज के दौर में मिलना मुश्किल है मैनें आज तक का इसका पूरा संघर्षमय जीवन देखा है। मैं अपने इस छोटे भाई को जो मुझे बहुत-बहुत प्यार करता है बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ और ईश्वर से कामना करता हूँ कि यह दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करे।
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रिस्तों की खुश्बू से जिनका तन-मन हर पल सुगन्धित रहता है और उस सुगन्ध से लेखनी को सराबोर करने वाले दिनेश रघुवंशी ने अपने अत्यंत संवेदनशील गीतों, ग़ज़लों, मुक्तकों, से साहित्य जगत तथा काव्य मंचों को सुसज्जित करके देश-विदेश के लाखों लोगों के दिलों पर अपनी श्रेठ रचनाओं के हस्ताक्षर अंकित किये हैं। उनको सदैव मेरा स्नेह व आभार ।
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दिनेश जी का समस्त रचना संसार जीवन से जुड़ा हुआ है। उनके अनेक गीत मुझे याद है। आज के हिन्दी कवि सम्मेलन के संचालक के मुख से दिनेश जी के मुक्तक सर्वाधिक सुनाई पड़ते है। कविता के साथ-साथ दिनेश जी के व्यक्तित्व में सदैव किसी की भी सहायता के लिए तत्पर रहने का अदभुत गुण है। दिनेश जी के उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
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हिन्दी कविता के मंच और साहित्य दोनों स्तरों पर बहुचर्चित दिनेश रघुवंशी एक ऐसे कवि हैं जिन्होंने अपनी कविता के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। वो चाहे गीत लिखें या गजल, मुक्तक लिखें या छंद, सभी में अपने जीवन के अनुभव और सामाजिक दर्द की अभिवयक्ति के माध्यम से, अपने पाठको और श्रोताओं तक पहुँच कर, उनके हृदय में सीधे उतरते है। वो चाहें अपने देश में हों या विदेश में, अपनी कविताओं की सहजता और सरलता के कारण - दिनेश रघुवंशी सभी को अदृश्य बन्धन में बाँध लेते हैं व्यक्ति के दर्द और उसके मनोविज्ञान से वो इतना परिचित है कि उनकी कविताएँ उनकी बाद में, पहले वे हमें अपनी सी लगती है। यह किसी भी रचनाकार के लिए एक सौभाग्य का विषय माना जाता है। उनकी कविताओं में उनके विशाल हृदय, निर्भिकता, संवेदनशीलता और उनके मर्यादित व्यक्तित्व के दर्शन तो होते ही है, साथ ही काव्य के सभी मानको पर भी उनकी प्रत्येक रचना खरी उतरती है। भाषा,शिल्प और विविध भाव भंगिमाओं को सुंदर शब्दों में प्रस्तुत करने में निपुण, मेरे अत्यन्त प्रिय कवि और श्रेष्ठ रचनाकार दिनेश रघुवंशी का गीत संग्रह ‘अनकाहा इससे अधिक है’ पठकों को अत्यधिक आत्म संतोष देगा और जीवन में उपयोगी भी सिद्ध होगा, ऐसा मेरा अटूट विश्वास है। शुभकामनाओं के साथ
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दिनेश रघुवंशी की शायरी मात्र शौक नही अपितु ईमानदार जिन्दगी जीने की ललक है। उनकी काव्य – यात्रा सत्य और संघर्ष का सतत अन्वेषण है। भाषा, शैली और शब्द-चयन मै उनकी संवेदनाओं की अनुगूँज दूर तक सुनायी पड़ती है अन्तर की पीड़ा ही उनकी काव्य – गुरु है, जिसने उन्हें सच्ची शायरी का मंत्र सिखाया। दिनेश रघुवंशी की गजलें पढ़ना – सुनना एक आत्मिक आनंद की अनुभूति हैं। मैं सहर्ष स्वीकारता हूँ कि अपने समकालीन कलम कारों में दिनेश रघुवंशी सदैव अग्रणी रहें हैं। कविता के संक्रमण काल में श्रेष्ठ साहित्य को मंचो पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान हैं। ‘दो पल’ दिनेश रघुवंशी का दूसरा गजल संग्रह हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि साहित्य जगत में इस संग्रह का बेहद गरमजोशी से स्वागत होगा। शुभकामानाओं सहित।
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दिनेश रघुवंशी एक ऐसा नाम है, जो मेरे हृदय के बेहद नजदीक हैं। सिर्फ़ नाम से ही नहीं, दरअसल उसने मुझे प्रभावित किया है अपने काम से। वर्तमान में जो युवा कवि गीत-गजल कह रहे हैं, उनमें मैं दिनेश रघुवंशी को सर्वोच्च स्थान देता हूँ। विषय का चयन, कथन की मौलिकता, शैली का नयापन उनको प्रभु की ओर से स्वमेव प्राप्त है। मंच पर उनका कवि और व्यक्तित्व सबसे अलग दिखाई देता है। आने वाला कल उनकी मुट्ठी में है, मैं ऐसा मानता हूँ। लिखने की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए उनके गीतों से प्रेरणा लेनी चाहिए। नए-नए तुकान्त तथा नये छंद की घडंत में दिनेश रघुवंशी खूब माहिर हैं। पढ़ने और सुनने दोनो में अच्छा लगना बहुत कम लोगों में देखा जाता है। उन्होंने जैसा भोगा वैसा लिखा है। दिनेश रघुवंशी की कलम ने ममत्व और रिश्तों को नई परिभाषाएं दी हैं। मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ हैं कि अनन्त काल तक दिनेश रघुवंशी के ही समान उनके गीतों की शुआएँ हर दिशा में अपनी रौशनी बिखेरती रहें।
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Dinesh Raghuvanshi is a famous Hindi Poet and Stage Organizer. He is considered to be among the best eight poets in India. He is better than the best of Laughter Champions of India. His father died when he was young. so he was brought up by his mother. He feels grateful to his mother for whatever he has achieved in life. As a mark of respect to his mother he has written 7oo poems on the topic of ‘Mother’ in Hindi. It is a literary marvel and deserves to be enlisted in the Guinness Book of Records. When he recites these poems the whole audience is reduced to tears. It is a sight to see the audience wiping tears with their handkerchiefs. He is hoping to take this figure to at least 1000 poems soon.The famous Russian author Maxim Gorky wrote the book ‘Mother’ which was instrumental in bringing Russian Revolution. Let us hope Dinesh Raghuvanshi’s 7oo+ poems on mother bring another revolution. He is not only a great son of his mother but also a great son of India. Dinesh Raghuvanshi was born in Bulandshahar District, Uttar Pradesh and now lives in Faridabad, Haryana.Original link JatLand.com








