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हर इक इंसान को इक दिन मौहब्बत आजमाती है
किसी से रूठ जाती है किसी पर मुस्कुराती है
भला इंसान की तकदीर का ये खेल है कैसा
किसी का कुछ नहीं जाता किसी की जान जाती है
अगर दिल दे दिया तो फिर न कोई जुस्तजू रखना
अगर हो जुस्तजू तो मत किसी के रुबरू रखना
मौहब्बत हर कदम पर इम्तिहानों से गुजरती है
मौहब्बत करने वाले तू भी इसकी आबरू रखना
दिलों में कितनी चाहत थी हमें कहना नहीं आया
सितम तो खूबसूरत था हमें सहना नहीं आया
वो बीते कल की बातें आज दोहराने से क्या हांसिल
सनम दरिया थे हम दोनों मगर बहना नहीं आया
मेरे अहसास को तूने किसी काबिल नहीं समझा
धड़कता है जो मुझमें तूने मेरा दिल नहीं समझा
मुझे तुझसे शिकायत है तो बस इतनी शिकायत है
मुझे बस रास्ता समझा मुझे मंजिल नहीं समझा
कभी ये सोचता हूँ काश तू उल्फ़त समझ लेता
कभी ये सोचता हूँ प्यार की कीमत समझ लेता
मेरी किस्मत तो जैसी थी शिकायत ही नहीं लेकिन
तेरी किस्मत नहीं थी तू मेरी चाहत समझ लेता
फ़कत बादल की तरह से बिखरना चाहता था बस
मुककदर ही तेरे हाथों संवरना चाहता था बस
मेरे होठों पे दुनिया ने बहुत खामोशीयाँ रख दीं
घड़ी भर ही मैं तुझसे बात करना चाहता था बस
मिलन के पल जो आये तो बहुत सी दूरियाँ रख दीं
उजाले मांगे तो तकदीर में तारीकियाँ रख दीं
कभी जब भी मेरा ये मन हुआ खामोशियाँ तोड़ूँ
मेरे होठों पे आकर के किसी ने उंगलियाँ रख दीं
भुलाना चाहता हूँ और तेरी याद आती है
भुलाने की हर इक कोशिश यूं ही बेकार जाती है
भुला दी हैं बहुत सी बात बीते वक्त ने लेकिन
तेरी पायल की रुनझुन तो मुझे अक्सर सताती है
तेरी जुल्फ़ों के साये से निकलना कौन चाहेगा
तेरे आगोश में गिरकर संभलना कौन चाहेगा
लकीरों में मेरे हाथों की तेरा नाम लिक्खा है
भला किस्मत के लिक्खे को बदलना कौन चाहेगा
मुझे डर है कहीं तन्हाई से अपनी न डर जाये
मुझे डर है कहीं वो टूटकर के ना बिखर जाये
खुदा मेरी दुआओं में असर इतना तो रख लेना
अगर वो डूबना चाहे तो दरिया ही उतर जाये
निराले रंग जीवन के अजब दुनिया का मेला है
यहाँ हर आदमी केवल समय के हाथ खेला है
भले ही भीड़ है अपनों की लेकिन भीड़ में रहकर
यहाँ मैं भी अकेला हूँ वहाँ तू भी अकेला है
कभी सोचूं मुझे क्यूं दर्द की जागीर बक्शी है
कभी सोचूं मुझे ये किसलिए तकदीर बक्शी है
सुना है इम्तिहाँ होते हैं केवल खास लोगों के
खुदा ने खास समझा तो मुझे ये पीर बख्शी है
किसी तक दिल की बातें जो कभी पहूँचा नही पाया
जो खुद को तीरगी से रोशनी में ला नहीं पाया
भला वो जिंदगी की उलझनें सुलझायेगा कैसे
किसी की जुल्फ़ जो बिखरी हुई सुलझा नहीं पाया
कजा आती है पल – पल, जिंदगी मुश्किल से आती है
अगर हंसना भी चाहें तो, हंसी मुश्किल से आती है
उसी का नाम होठों पर उसी को है दुआ दिल से
जिसे शायद हमारी याद भी मुश्किल से आती है
यूं छुपकर रोज मिलने का बहाना खूबसूरत है
नजर मिलते ही नजरों का चुराना खूबसूरत है
नहीं कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं फिर तो
तुम्हारा साथ जब तक है, जमाना खूबसूरत है
फ़िजा भी खूबसूरत है, सनम भी खूबसूरत है
सितम भी खूबसूरत है करम भी खूबसूरत है
करिश्माई निगाहों के करिश्मों का भी क्या कहना
हकीकत खूबसूरत है भरम भी खूबसूरत है

