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	<title>कवि दिनेश रघुवंशी :: ग़ज़ल ::</title>
	<link>http://dineshraghuvanshi.com/kavi/gazal</link>
	<description>Welcome to the world of Kavi Dinesh Raghuvanshi</description>
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		<title>बच्चे बात नहीं करते</title>
		<description>मिलते हैं पर मिलके बात नहीं करते
करते हैं तो दिल से बात नहीं करते

पहले वक़्त नहीं था बच्चों की खातिर
वक़्त मिला अब बच्चे बात नहीं करते

ख़ुद से ही बतियाता रहता है अक्सर
उसके अपने उससे बात नहीं करते

उसने कितनी बातें की थीं अपनों से
अब कहता है अपने बात नहीं करते

पैसा पैसा ...</description>
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		<title>अपनी आवाज ही सुनूँ कब तक</title>
		<description>अपनी आवाज ही सुनूँ कब तक
इतनी तन्हाई में रहूँ कब तक
इन्तिहा हर किसी की होती है
दर्द कहता है मैं उठूँ कब तक 
मेरी तकदीर लिखनेवाले, मैं 
ख्वाब टूटे हुए चुनूँ कब तक
कोई जैसे कि अजनबी से मिले 
खुद से ऐसे भला मिलूँ कब तक
जिसको आना है क्यूँ नहीं आता
अपनी पलकें ...</description>
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		<title>चुप्पियाँ तोड़ना जरुरी है</title>
		<description>चुप्पियाँ तोड़ना जरुरी है
लब पे कोई सदा जरुरी है
आइना हमसे आज कहने लगा
खुद से भी राब्ता जरुरी है
हमसे कोई खफ़ा-सा लगता है
कुछ न कुछ तो हुआ जरुरी है
जिंदगी ही हसीन हो जाए
इक तुम्हारी रजा जरुरी है
अब दवा का असर नहीं होगा
अब किसी की दुआ जरुरी है </description>
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		<title>गहरी प्यास को जैसे मीठा जल देते तुम बाबूजी</title>
		<description>गहरी प्यास को जैसे मीठा जल देते तुम बाबूजी 
जीवन को सारे प्रश्नों के हल देते तुम बाबूजी
सबके हिस्से शीतल छाया, अपने हिस्से धूप कड़ी
गर होते तो काहे ऐसे पल देते तुम बाबूजी
माँ तो जैसे – तैसे रुखे सूखे टूकड़े दे पायी
गर होते तो टाफ़ी, बिस्कुट, फल देते तुम बाबूजी
अपने ...</description>
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	<item>
		<title>ओस की बूँदें पड़ीं तो पत्तियाँ खुश हो गई</title>
		<description>ओस की बूँदें पड़ीं तो पत्तियाँ खुश हो गई
फूल कुछ ऐसे खिले कि टहनियाँ खुश हो गई
बेखुदी में दिन तेरे आने के यूँही गिन लिये
अक पल को यूँ लगा कि उँगलियाँ खुश हो गई
देखकर उसकी उदासी, अनमनी थीं वादियाँ
खिलखिलाकर वो हँसा तो वादियाँ खुश हो गई
आँसुओं में भीगे मेरे शब्द ...</description>
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	<item>
		<title>जिनके हिस्से अपनी माँ की लोरियाँ आती नहीं</title>
		<description>जिनके हिस्से अपनी माँ की लोरियाँ आती नहीं
उनके सपनों में भी परियाँ, तितलियाँ आती नहीं
नींव पर जो स्वार्थ की चुनते गये, बुनते गये 
ऐसे रिश्तों में  कभी नजदीकियाँ आती नहीं
मेरी इन आँखों के आँसू जानते हैं बात ये
मेरी पलकों तक कीसी की उँगलियाँ आती नहीं
एक मुददत से मुझे तुम ...</description>
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	<item>
		<title>आनी-जानी दुनिया है</title>
		<description>आनी-जानी दुनिया है
ये कब किसकी दुनिया है
दुनिया में सब लोगों की
अपनी –अपनी दुनिया है
सबसे अच्छा अपना घर
यूँ तो सारी दुनिया है
उसको ये अहसास कहाँ
उससे मेरी दुनिया है
अब उस पर क्या हक़ मेरा
उसकी अपनी दुनिया है </description>
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	<item>
		<title>मेरा कितना ख़्याल रक्खा है</title>
		<description>मेरा कितना ख़्याल रक्खा है
उसने खुद को सभाल रक्खा है
दर्द से दोस्ती है बरसों की
दर्द सीने में पाल रक्खा है
मेरी दरियादिली ने ही मुझको
गहरे दरिया मेम डाल रक्खा है
उसने मुश्किल का हल बताने में
और मुश्किल में डाल रक्खा है
घर की बढ़ती ज़रुरतों ने उसे 
घर से बाहर निकाल रक्खा है </description>
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	<item>
		<title>लगने लगी हैं दिल को यूँ अच्छी उदासियाँ</title>
		<description>लगने लगी हैं दिल को यूँ अच्छी उदासियाँ
चलती हैं साथ हौसला देती उदासियाँ
इक रोज़ ज़िन्दगी से यूँ बोली उदासियाँ
हर आदमी के साथ हैं उसकी उदासियाँ
ये कौन दे गया हमें इतनी उदासियाँ
हर इक ख़ुशी के साथ हैं लिपटी उदासियाँ
कुछ से ख़ुदा ने दूर ही रक्खी उदासियाँ
कुछ को ख़ुदा ने सौंप दीं ...</description>
		<link>http://dineshraghuvanshi.com/kavi/gazal/2008/10/14/%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%85%e0%a4%9a%e0%a5%8d/</link>
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	<item>
		<title>इक मुसलसल सफ़र में रहता हूँ</title>
		<description>इक मुसलसल सफ़र में रहता हूँ
ये मैं किसके असर में रहता हूँ
मुझको ये बेखुदी कहाँ लाई
अब मै सबकी नज़र में रहता हूँ
जब भी सोचूँ मैं कुछ तुझे लेकर 
एक अन्जाने डर में रहता हूँ
देवता होता तो निकल पाता
आदमी हूँ, भँवर में रहता हूँ
घर की दुनिया से कुछ नही अच्छा
घर से ...</description>
		<link>http://dineshraghuvanshi.com/kavi/gazal/2008/10/14/%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%9e%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/</link>
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