चुप्पियाँ तोड़ना जरुरी है
लब पे कोई सदा जरुरी है
आइना हमसे आज कहने लगा
खुद से भी राब्ता जरुरी है
हमसे कोई खफ़ा-सा लगता है
कुछ न कुछ तो हुआ जरुरी है
जिंदगी ही हसीन हो जाए
इक तुम्हारी रजा जरुरी है
अब दवा का असर नहीं होगा
अब किसी की दुआ जरुरी है
कवि, ग़ज़लकार एवं गीतकार, सभी प्रमुख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, आकाशवाणी व अन्य चैनल्स पर कवि-सम्मेलनों का संचालन एवं काव्य-प्रस्तुति
