ओस की बूँदें पड़ीं तो पत्तियाँ खुश हो गई
फूल कुछ ऐसे खिले कि टहनियाँ खुश हो गई
बेखुदी में दिन तेरे आने के यूँही गिन लिये
अक पल को यूँ लगा कि उँगलियाँ खुश हो गई
देखकर उसकी उदासी, अनमनी थीं वादियाँ
खिलखिलाकर वो हँसा तो वादियाँ खुश हो गई
आँसुओं में भीगे मेरे शब्द जैसे हँस पड़े
तुमने होठों से छुआ तो चिटठियाँ खुश हो गई
साहिलों पर दूर तक चुपचाप बिखरी थीं जहाँ
छोटे बच्चों ने चुनी तो सीपीयाँ खुश हो गई


September 11th, 2010 at 11:11 am
waah sir, kya baat hai
January 6th, 2011 at 6:09 am
wahhh sir kya khub likha ha…..jin chizon ham sirf feel kar sakte ha or byan nai kar sakte ha ….unko aapne bayan kiya….bahut khub sir…:)