तुम अधूरी बात सुनकर चल दिए-
जो सुना तुमने अभी तक, अनसुना इससे अधिक है
जो कहा मैंने अभी तक, अनकहा इससे अधिक है
मैं तुम्हारी और अपनी ही कहानी लिख रहा था
वक़्त ने जो की थी मुझपे मेहरबानी लिख रहा था
पत्र मेरा अन्त तक पढ़ते तो ये मालूम होता
मैं तुम्हारे नाम अपनी ज़िन्दगानी लिख रहा था
तुम अधूरा पत्र पढ़कर चल दिए-
जो पढ़ा तुमने अभी तक, अनपढ़ा इससे अधिक है
जो कहा मैंने अभी तक, अनकहा इससे अधिक है
प्रार्थना में लग रहा कोई कमी फिर भी रह गई है
हंस रहा हूं किन्तु पलकों पर नमी फिर रह गई है
फिर तुम्हारी ही क़सम ने इस क़दर बेबस किया
ज़िन्दगी हैरान मुझको देखती फिर रह गई है
भाग्य-रेखाओं में मेरी आज तक-
जो लिखा तुमने अभी तक, अनलिखा इससे अधिक है
जो कहा मैंने अभी तक, अनकहा इससे अधिक है
हो ग़मों की भीड़ फिर भी मुस्कु्राऊँ, सोचता हूं
मैं किसी को भूलकर भी याद आऊँ, सोचता हूं
कोई मुझको आँसुअओं कि तरह पलकों पर सजाये
ओर करे कोई इशारा, टूट जाऊँ सोचता हूं
ज़िन्दगी मुझसे मिली कहने लगी-
जो गुना तुमने अभी तक, अनगुना इससे अधिक है
जो कहा मैंने अभी तक, अनकहा इससे अधिक है
यूं तो शिखरों से बड़ी ऊँचाईयों को छू लिया है
छूने को पाताल-सी गहराईयों को छू लिया है
विष भरी बातें हंसी जब बींध कर मेरे ह्रदय को
खुश्बुएँ छूकर लगा अच्छाईयों को छू लिया है
तुम मिले जिस पल मुझे ऐसा लगा-
हो छुआ मैंने अभी तक, अनछुआ इससे अधिक है
जो कहा मैंने अभी तक, अनकहा इससे अधिक है
तुम अधूरी बात सुनकर चल दिए…


December 18th, 2008 at 10:02 pm
aapki geeton me prem ka vishwash bikhra hai kahi sawan kahi patjhad kahi madhumash bikhra hai,,,aapki likhi har baaten dil chhu karke gujarti hain,shayad inhi geeton me aapka koi anchhuaa ahsaas bikhra hai,,,sir mai koi writer nahi hu kahi koi galti ho to pls maf kar denaa,,
December 27th, 2010 at 12:19 am
ankhaa is-se adhik h.. mere ek mittar ne mujhe ya poem bheja tha…. ye padkar meri ankho se aansu chalak gye… kitna dard, apnapan aur gehrai h ismein. apko naman paranaam hai mera… aise hi aap hamesha likhte rahein meri yahi kaamna hai.