तुमसे मिलकर जीने की चाहत जागी
प्यार तुम्हारा पाकर ख़द से प्यार हुआ
तुम औरों से कब हो,तुमने पल भर में
मन के सन्नाटों का मतलब जान लिया
जितना मैं अब तक ख़द से अन्जान रहा
तुमने वो सब पल भर में पहचान लिया
मुझपर भी कोई अपना ह्क़ रखता है
यह अहसास मुझे भी पहली बार हुआ
प्यार तुम्हारा पाकर ख़द से प्यार हुआ
ऐसा नहीं कि सपन नहीं थे आँखों में
लेकिन वो जगने से पहले मुरझाए
अब तक कितने ही सम्बन्ध जिए मैंने
लकिन वो सब मन को सींच नहीं पाये
भाग्य जगा है मेरी हर प्यास क
तप्ति के हाथों ही खुद सतकार हुआ
प्यार तुम्हारा पाकर ख़द से प्यार हुआ
दिल कहता है तुम पर आकर ठहर गई
मेरी हर मजबूरी, मेरी हर भटकन
दिल के तारों को झंकार मिली तुमसे
गीत तुम्हारे गाती है दिल की धड़कन
जिस दिल पर अधिकार कभी मैं रखता था
उस दिल क हाथों ही अब लाचार हुआ
प्यार तुम्हारा पाकर खुद से प्यार हुआ
बहकी हुई हवाओं ने मेरे पथ पर
दूर-दूर तक चंदन-गंध बिखेरी है
भाग्य देव ने स्वयं उतरकर धरती पर
मेरे हाथ में रेखा नई उकेरी है
मेरी हर इक रात महकती है अब तो
मेरा हर दिन जैसे इक त्यौहार हुआ
प्यार तुम्हारा पाकर खुद से प्यार हुआ


March 31st, 2010 at 6:31 am
Dinesh ji, aapke geet dil main utarte ja rahe hain. itne saare achche geeton ko ek din main sambhalana muskil hai. Rojana ek ek karke padhoonga.
September 26th, 2010 at 11:21 am
real love
May 16th, 2011 at 4:57 am
sir apka ye geet padhkar, really khud se pyar hua.