• Listen this geet Listen

    इक लड़की भोली-भाली सी
    महके फूलों की डोली – सी
    निश्छल, निर्मल, चंचल धारा
    जैसे तोड़ के चले किनारा
    नेह के अमरित कलश से मेरी
    जीवन बगिया को सींचे
    जिसके पीछे दुनिया पागल
    वो पागल मेरे पीछे…

    वो दुनिया का गणित न जाने
    सबकी बातें सच्ची माने
    जागी आँखों में कुछ सपने
    उसको सब लगते हैं अपने
    झील-सी गहरी आँखें सुहानी
    जैसे कहें अनकही कहानी
    मौन निमन्त्रण मुझको जिसका
    कोई अर्थ स्वयं गढ़ लूँ
    उसकी चाहत बस मैं उसकी
    आँखों में चेहरा पढ़ लूँ
    उससे कुछ कहना चाहूँ तो
    हँसकर अँखियों को मींचे
    जिसके पीछे दुनिया पागल
    वो पागल मेरे पीछे…

    उसका जीवन खुली हथेली
    वो क्या जाने प्यार पहेली
    वेद ॠचाओं-सी वो पावन
    उससे महके प्रीत का चंदन
    सारा खालीपन भर देगी
    जीवन वृंदावन कर देगी
    देह-सृष्टि ऐसी कि जैसे
    लाखों वंदनवार सजे
    उसकी मादक छुवन से पल में
    मन – वीणा के तार बजे
    इक अनदेखे-से बंधन में
    मुझको अपनी ओर खींचे,
    जिसके पीछे दुनिया पागल
    वो पागल मेरे पीछे…

    आँचल में खुश्बू भर लाई
    उससे महक उठी अँगनाई
    मौसम की पहली बारिश वो
    अब मेरी भी हर ख्वाहिश वो
    डरता हूँ कुछ कर ना जाये
    ना बोलूँ तो मर ना जाये
    सोच रहा हूँ आखिर कैसे
    अब मैं उसको समझाऊँ
    उसको समझाते –समझाते
    खुद पागल ना हो जाऊँ
    मन करता है रख दूँ दिल को
    उसकी पलकों के नीचे
    जिसके पीछे दुनिया पागल
    वो पागल मेरे पीछे…

    Posted by admin @ 7:02 am

3 Responses

WP_Cloudy

Leave a Comment

Please note: Comment moderation is enabled and may delay your comment. There is no need to resubmit your comment.